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Bihar Education News: बिहार के हर जिले में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्कूलों में AI और रोबोटिक्स की पढ़ाई

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक बनाने की तैयारी है। हर जिले में एक स्कूल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने और AI, रोबोटिक्स, एनिमेशन, मोबाइल रिपेयरिंग समेत नए स्किल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है।

पटना, 3 अक्टूबर आलम की खबर: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का दायरा आने वाले समय में सिर्फ किताबों और परीक्षा की तैयारी तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान और रोजगार से जोड़ने की दिशा में बढ़ाया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। प्रस्तावित योजना के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में एक स्कूल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित किया जाएगा, जहां विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ नई तकनीक और रोजगारपरक कौशल से जुड़े प्रशिक्षण का अवसर देने की तैयारी है।

हर जिले में एक स्कूल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की योजना

शिक्षा विभाग की योजना के अनुसार प्रत्येक जिले से एक स्कूल का चयन किया जाएगा। इन स्कूलों में मौजूदा शैक्षणिक व्यवस्था के साथ तकनीकी और कौशल आधारित शिक्षा को जोड़ा जाएगा।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए चुने जाने वाले स्कूलों में विद्यार्थियों को अलग-अलग करियर विकल्पों की जानकारी देने के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। इसके लिए स्कूल में आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण व्यवस्था और पाठ्यक्रम तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को इस पूरी व्यवस्था के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें स्कूलों के चयन, जरूरी सुविधाओं, पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाना है।

पुराने ट्रेड की जगह नए जमाने के कौशल पर जोर

बिहार में पहले से चल रहे व्यावसायिक शिक्षा के ट्रेड और पाठ्यक्रमों की भी समीक्षा किए जाने की तैयारी है। ऐसे ट्रेड जिनकी रोजगार के लिहाज से उपयोगिता कम हो गई है, उनकी जगह वर्तमान समय की जरूरत से जुड़े नए पाठ्यक्रम लाने पर जोर दिया जा रहा है।

प्रस्तावित नए क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, एनिमेशन डिजाइनिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषय शामिल हैं।

इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूली स्तर से ही तकनीक के साथ परिचित कराना और उन्हें आगे की पढ़ाई या रोजगार के लिए जरूरी बुनियादी कौशल उपलब्ध कराना है।

पढ़ाई के साथ करियर की तैयारी

नई व्यवस्था में विद्यार्थियों को केवल किसी एक ट्रेड की जानकारी देने के बजाय अलग-अलग करियर विकल्पों से परिचित कराने की योजना है। तकनीकी प्रशिक्षण के साथ यह भी बताया जाएगा कि संबंधित कौशल का इस्तेमाल आगे किस तरह के रोजगार या प्रशिक्षण में किया जा सकता है।

इससे विद्यार्थियों को स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद केवल पारंपरिक डिग्री आधारित विकल्पों पर निर्भर रहने के बजाय कौशल आधारित क्षेत्रों की जानकारी मिल सकेगी।

शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश

व्यावसायिक शिक्षा में बदलाव को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की ओर से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। बैठक में व्यावसायिक शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए केवल अतिरिक्त विषय के रूप में नहीं, बल्कि संभावित करियर विकल्प के तौर पर विकसित करने पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही ITI और औद्योगिक प्रशिक्षण से जुड़े विकल्पों को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार पर भी ध्यान देने को कहा गया है।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह जानकारी देना है कि स्कूली शिक्षा के बाद तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल आधारित पाठ्यक्रम भी करियर का रास्ता बन सकते हैं।

उद्योगों की जरूरत देखकर तैयार हो सकता है पाठ्यक्रम

प्रस्तावित बदलाव में पाठ्यक्रम को रोजगार बाजार और उद्योगों की जरूरत से जोड़ने की बात भी सामने आई है। जिन पुराने ट्रेड की मांग कम हो चुकी है, उनके स्थान पर आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक कौशल से जुड़े पाठ्यक्रम शामिल करने की तैयारी है।

इसके लिए तकनीकी शिक्षण संस्थानों और विशेषज्ञ संस्थाओं से सहयोग लेने की संभावना भी है। निफ्ट समेत अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ संपर्क कर नए पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विचार किया जा सकता है।

छात्रों को AI और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों से जोड़ने की तैयारी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्र तेजी से शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से जुड़ रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में इन विषयों को स्कूली स्तर पर परिचित कराने की कोशिश की जा रही है।

एनिमेशन डिजाइनिंग और मोबाइल रिपेयरिंग जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों को भी संभावित पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात है। इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े प्रशिक्षण के जरिए विद्यार्थियों को तकनीकी कामकाज की शुरुआती जानकारी देने का लक्ष्य रखा जा सकता है।

सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का दायरा बढ़ाने की कोशिश

अगर यह योजना तय प्रारूप के अनुसार लागू होती है तो सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को पारंपरिक विषयों के साथ कौशल और तकनीक आधारित शिक्षा का भी अवसर मिलेगा।

इस व्यवस्था में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चुने गए स्कूलों को आधुनिक संसाधनों से लैस करने, प्रशिक्षित लोगों के माध्यम से प्रशिक्षण देने और रोजगार की बदलती जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने पर जोर रहेगा।

बिहार में व्यावसायिक शिक्षा को आधुनिक बनाने की यह पहल लागू होने के बाद विद्यार्थियों के लिए स्कूली शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश होगी। हालांकि योजना के अंतिम स्वरूप, स्कूलों के चयन, पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत जानकारी आधिकारिक स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

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